RBI Rate Cut: महंगाई में रिकॉर्ड गिरावट के बाद अर्थशास्त्री दिसंबर में रेपो रेट में कमी की उम्मीद कर रहे हैं, जिससे होम लोन, कार लोन समेत सभी तरह के कर्ज सस्ते हो सकते हैं।
अर्थव्यवस्था को महंगाई (Inflation) में आई गिरावट से मिली राहत के बाद, अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक (Monetary Policy Meeting) पर टिकी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI दिसंबर में ब्याज दरों (Interest Rates) में कटौती कर सकता है, जिसका सीधा फायदा 2026 की शुरुआत में आम लोगों को सस्ते लोन और कम EMI के रूप में मिल सकता है।
महंगाई में आई बड़ी गिरावट
इस उम्मीद की सबसे बड़ी वजह अक्टूबर महीने में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) का रिकॉर्ड स्तर तक गिरना है। अक्टूबर में महंगाई दर घटकर मात्र 0.25% रह गई, जो सितंबर में 1.44% थी। यह अब तक की सबसे कम महंगाई दर (CPI) मानी जा रही है। इस गिरावट के पीछे खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी और मुख्य महंगाई दर (Core Inflation) में सुधार है।
क्रिसिल की रिपोर्ट ने जताई और गिरावट की उम्मीद
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने भी अपनी एक रिपोर्ट में महंगाई के और नरम पड़ने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में औसत खुदरा महंगाई दर 2.5% रह सकती है, जो पिछले साल के 4.6% के मुकाबले काफी कम है। इसकी वजह खाद्य आपूर्ति में मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में कमी और जीएसटी दरों में कटौती का असर है।
क्रिसिल ने यह भी कहा है कि अक्टूबर में कई वस्तुओं पर जीएसटी में कमी का पूरा फायदा अभी तक ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है, जिसका असर नवंबर के आंकड़ों में दिखेगा। उम्मीद है कि नवंबर में महंगाई दर लगभग 0.9% रह सकती है।
दिसंबर में हो सकती है RBI से बड़ी घोषणा
ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, महंगाई में इस सुधार और खाद्य कीमतों में स्थिरता के चलते RBI के पास दिसंबर की नीति बैठक में ब्याज दरों (Repo Rate) में कटौती करने का मौका है।
लोन लेने वालों के लिए क्या मायने हैं इसके?
अगर RBI दिसंबर में ब्याज दरें घटाता है, तो इसके निम्नलिखित फायदे देखने को मिल सकते हैं:
- EMI में कमी: होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन जैसी सभी मौजूदा EMI की किश्तों में कमी आ सकती है।
- नए लोन होंगे सस्ते: नया लोन लेने वाले ग्राहकों को कम ब्याज दरों पर लोन मिल सकेंगे।
- निवेश पर असर: ब्याज दरों में गिरावट का असर बॉन्ड बाजार समेत अन्य निवेश विकल्पों पर भी पड़ेगा।





