बिना सिगरेट पिए भी कैसे हो रहा है फेफड़ों का कैंसर ? वजह जानकर आप भी दंग रह जाएंगे!

बिना सिगरेट पिए भी कैसे हो रहा है फेफड़ों का कैंसर

फेफड़ों का कैंसर को लेकर एक आम धारणा यही रही है कि यह सिर्फ तंबाकू या धूम्रपान की वजह से होता है। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। वायु प्रदूषण आज लंग कैंसर का एक प्रमुख और खतरनाक कारण बनकर उभरा है, भले ही आपने कभी सिगरेट न भी पी हो।

क्या कहते हैं आंकड़े?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के GLOBOCAN 2022 डेटाबेस के अनुसार:

  • दुनिया भर में लंग कैंसर के 24.5 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए।
  • इससे 18 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई।
  • भारत में 2022 में लंग कैंसर के 81,500 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए, जो यहां होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है।

प्रदूषण और लंग कैंसर का सीधा संबंध

‘ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर’ में 4 अप्रैल, 2025 को प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 जैसे महीन कण, जिनमें सल्फेट, ऑर्गेनिक कंपाउंड और भारी धातुएं होती हैं, सीधे फेफड़ों में पहुंचकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।

कितने बदल गए हैं कारण?

विशेषज्ञों के अनुसार, 30-40 साल पहले लंग कैंसर के 90% मामले धूम्रपान से होते थे। लेकिन आज हालात बदल गए हैं:

  • लगभग 43% मामले अब भी बीड़ी-सिगरेट की वजह से होते हैं।
  • लगभग 43% मामले ही प्रदूषण की वजह से सामने आ रहे हैं।

चिंता की बात यह है कि जहां धूम्रपान का सेवन धीरे-धीरे कम हो रहा है, वहीं उद्योगों और वाहनों के बढ़ने से प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में प्रदूषणजनित लंग कैंसर के मामले और बढ़ने की आशंका है।

लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

इसके शुरुआती लक्षण सामान्य हो सकते हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है:

  1. लगातार बनी रहने वाली खांसी: अगर खांसी एक महीने से ज्यादा बनी रहे और ठीक होने के बजाय बढ़ती जाए।
  2. खांसी में खून आना: यह एक गंभीर चेतावनी है, जिस पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  3. अन्य लक्षण: बीमारी बढ़ने पर सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, वजन कम होना और भूख न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

प्रदूषण से होने वाले लंग कैंसर से खुद को कैसे बचाएं?

हालांकि हम प्रदूषण पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते, लेकिन कुछ उपाय अपनाकर अपने फेफड़ों को सुरक्षित रख सकते हैं:

  • घर के अंदर:
    • एयर प्योरिफायर या एयर फिल्टर का इस्तेमाल करें।
  • घर के बाहर:
    • मास्क पहनें: जब भी बाहर निकलें, N95 या N99 मास्क जरूर पहनें। ये PM2.5 के खतरनाक कणों को 95% से 99% तक फिल्टर कर सकते हैं।
    • बाहरी गतिविधियां सीमित करें: जब प्रदूषण (PM2.5 या PM10) का स्तर 300-400 से ऊपर हो, तो सुबह की सैर और अन्य बाहरी गतिविधियां कम कर दें।
    • सार्वजनिक परिवहन का उपयोग: व्यक्तिगत वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।

सार्वजनिक स्तर पर क्या करना जरूरी?

इस समस्या से निपटने के लिए तीन स्तरों पर पहल जरूरी है:

  1. सरकारी पहल: उद्योगों पर नियंत्रण, वाहनों की आवाजाही सीमित करना और सड़कों की पानी से धुलाई कराना।
  2. सार्वजनिक नीति: लोगों को प्रदूषण के खतरों और बचाव के उपायों के बारे में शिक्षित करना।
  3. स्वास्थ्य पहल: डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करना ताकि वे मरीजों को बेहतर सलाह दे सकें।

प्रदूषण एक सामूहिक समस्या है, लेकिन अपनी सुरक्षा व्यक्तिगत स्तर पर शुरू होती है। AQI के खराब होने पर घर के अंदर रहना, मास्क पहनना और लगातार बनी रहने वाली खांसी को नजरअंदाज न करना आपके फेफड़ों को स्वस्थ रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।