Super El Nino Alert: प्रशांत महासागर में उठ रही एक बड़ी समुद्री हलचल ने दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों ने महासागर के अंदर एक विशाल ‘केल्विन वेव’ एक्टिव होने की पुष्टि की है, जो धीरे-धीरे सुपर एल नीनो का रूप ले सकती है। इसका असर भारत के मौसम पर भी गंभीर रूप से पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर यह सिस्टम और मजबूत हुआ, तो भारत में भीषण गर्मी, कमजोर मानसून और दक्षिण भारत के तटीय शहरों में भारी बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। खासतौर पर चेन्नई को लेकर बड़ा खतरा बताया जा रहा है।
आखिर क्या है ‘सुपर एल नीनो’?
एल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति होती है, जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है। जब यह प्रभाव बहुत अधिक मजबूत हो जाता है, तो इसे ‘सुपर एल नीनो’ कहा जाता है।
कैसे बदलता है पूरी दुनिया का मौसम?
वैज्ञानिकों के अनुसार महासागर के अंदर गर्म पानी की एक विशाल लहर भूमध्य रेखा के पास तेजी से आगे बढ़ रही है। यह लहर समुद्र के नीचे मौजूद ठंडे पानी को ऊपर आने से रोक देती है। नतीजा यह होता है कि समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ जाता है और दुनियाभर का मौसम चक्र प्रभावित होने लगता है।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि सुपर एल नीनो भारत के मानसून को कमजोर कर सकता है। जून और जुलाई में कम बारिश होने की संभावना बढ़ सकती है, जिससे खेती और जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है।
उत्तर भारत में बढ़ सकती है गर्मी
एल नीनो के असर से उत्तर और मध्य भारत में तापमान सामान्य से काफी ऊपर जा सकता है। कई राज्यों में लंबे समय तक लू और सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा है।
चेन्नई के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
दक्षिण भारत के तटीय इलाकों, खासकर चेन्नई को लेकर वैज्ञानिक ज्यादा चिंतित हैं। माना जा रहा है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच बंगाल की खाड़ी से भारी मात्रा में नमी खिंच सकती है, जिससे तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में रिकॉर्डतोड़ बारिश हो सकती है।
2015 जैसी बाढ़ का फिर डर
चेन्नई में साल 2015 की विनाशकारी बाढ़ आज भी लोगों के जहन में ताजा है। उस समय भी एक मजबूत एल नीनो एक्टिव था। भारी बारिश के कारण शहर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब गया था।
चेन्नई की भौगोलिक स्थिति भी इसे ज्यादा संवेदनशील बनाती है। शहर समुद्र के बेहद करीब और काफी नीचा इलाका है। ऐसे में अत्यधिक बारिश होने पर पानी की निकासी धीमी हो जाती है और बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं।
कितना बड़ा हो सकता है खतरा?
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और कई अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि 2026 में बनने वाला एल नीनो बेहद खतरनाक हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ इसे 2015 से भी ज्यादा प्रभावशाली मान रहे हैं।
अगर आने वाले महीनों में समुद्र का तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो भारत समेत कई देशों में मौसम से जुड़ी बड़ी आपदाएं देखने को मिल सकती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों की क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और प्रशासन को पहले से तैयार रहने की सलाह दी गई है।




