चयन बोर्ड OMR घोटाला: राजस्थान में बड़ा खुलासा! 2018 की तीन भर्तियों में फर्जीवाड़ा, 5 गिरफ्तार – युवाओं की मेहनत पर सवाल

Rajasthan OMR Scam IN RAJASTHAN

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Rajasthan OMR Scam: सालों की मेहनत, रात-दिन पढ़ाई, और फिर OMR शीट में छेड़छाड़ से किसी और को नौकरी मिल जाए। राजस्थान के युवा इसी दर्द से गुजर रहे हैं। आज 20 जनवरी 2026 को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) में बड़ा घोटाला पकड़ा है। तीन पुरानी भर्ती परीक्षाओं में OMR डेटा में हेराफेरी हुई, जिससे अयोग्य उम्मीदवार पास हो गए। क्या यह सिर्फ शुरुआत है या और बड़े राज खुलेंगे?

चयन बोर्ड OMR घोटाला: आज क्या हुआ, SOG ने कैसे पकड़ा?

SOG ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें RSMSSB के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर (सिस्टम एनालिस्ट-कम-प्रोग्रामर) संजय माथुर शामिल हैं। ये लोग 2018 की तीन परीक्षाओं – महिला सशक्तिकरण सुपरवाइजर, लेबोरेटरी असिस्टेंट और एग्रीकल्चर सुपरवाइजर भर्ती – में फर्जीवाड़ा करने के आरोपी हैं। जांच में पता चला कि OMR शीट स्कैन करने के बाद कंप्यूटर सिस्टम में मार्क्स बढ़ाए गए।

लॉजिक सिंपल है – असली मार्क्स कम थे, लेकिन सिलेक्टेड कैंडिडेट्स के मार्क्स बढ़ाकर उन्हें पास कर दिया गया। ह्यूमर की बात? मेहनत करने वाले फेल, और पैसे देकर आने वाले पास – यह तो पुरानी कहानी लगती है, लेकिन अब पकड़ी गई!

कौन-कौन सी भर्तियां प्रभावित हुईं?

ये घोटाला तीन बड़ी भर्तियों में हुआ:

  • सुपरवाइजर (महिला सशक्तिकरण) डायरेक्ट रिक्रूटमेंट परीक्षा-2018
  • लेबोरेटरी असिस्टेंट रिक्रूटमेंट परीक्षा-2018
  • एग्रीकल्चर सुपरवाइजर रिक्रूटमेंट परीक्षा-2018

इन परीक्षाओं में कुल 3,212 पोस्ट थे, और 9,40,038 कैंडिडेट्स ने अप्लाई किया था। परीक्षाएं 2019 में हुईं, लेकिन OMR स्कैनिंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग का काम नई दिल्ली की रहाव लिमिटेड को आउटसोर्स किया गया था।

ओरिजिनल OMR शीट्स को दोबारा स्कैन करने पर मार्क्स में बड़ा अंतर मिला। अयोग्य कैंडिडेट्स सिलेक्ट हो गए – यह धोखा हजारों ईमानदार युवाओं के साथ हुआ।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा? लॉजिक और फैक्ट्स

OMR शीट्स स्कैन होने के बाद डेटा कंप्यूटर में स्टोर होता है। आरोपी कंपनी के कर्मचारियों ने यहां छेड़छाड़ की। मार्क्स बढ़ाए गए ताकि चुने गए लोग पास हो जाएं। संजय माथुर, जो बोर्ड के टेक्नोलॉजी हेड थे, इस साजिश में मुख्य भूमिका में थे।

एसओजी ने 60 लाख रुपये कैश और कई डॉक्यूमेंट्स जब्त किए। आरोप है कि पैसे लेकर 38 लोगों को सरकारी नौकरी दिलाई गई – जैसे 68 मार्क्स वाले को 138 कर दिया!

हंसिए मत, लेकिन यह सच है – मेहनत से ज्यादा पैसे चलते थे!

जांच और युवाओं का भविष्य

SOG की जांच जारी है। अगर यह साबित हुआ कि और भर्तियां प्रभावित हैं, तो रिजल्ट्स रद्द हो सकते हैं। बोर्ड को पारदर्शिता बढ़ानी होगी – जैसे OMR शीट्स दिखाना या नई व्यवस्था लागू करना।

युवा भड़के हुए हैं। सोशल मीडिया पर #OMRScam ट्रेंड कर रहा है। लॉजिकली सोचें – अगर बोर्ड के अंदर ही धोखा, तो विश्वास कैसे बनेगा? सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे।

चयन बोर्ड OMR घोटाला: सबक और उम्मीद

यह मामला राजस्थान की भर्ती प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। हजारों युवाओं की मेहनत बर्बाद हुई। लेकिन SOG की कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि न्याय होगा। फैंस, आप क्या सोचते हैं? क्या OMR प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो जानी चाहिए? कमेंट्स में बताएं – हम साथ हैं!