Donald Trump Greenland statement नई दिल्ली. दुनिया का सबसे ताकतवर नेता एक पुरस्कार न मिलने से इतना नाराज हो जाए कि वो पूरी दुनिया को हिला दे? डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को भेजे मैसेज में यही किया नोबेल पीस प्राइज न मिलने का गुस्सा निकाला और ग्रीनलैंड पर पूरा कंट्रोल मांगा। ये Donald Trump Greenland statement ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तूफान ला दिया है, जहां शांति की बात छोड़कर अब अमेरिका फर्स्ट का नारा गूंज रहा है।
ट्रंप का मैसेज: शांति छोड़ो, ग्रीनलैंड दो!
ट्रंप ने रविवार रात जोनास गहर स्टोर को मैसेज भेजा, जिसमें लिखा, “तुम्हारे देश ने मुझे 8 युद्ध रोकने के लिए नोबेल पीस प्राइज नहीं दिया, इसलिए अब मुझे सिर्फ शांति के बारे में सोचने की जरूरत नहीं लगती।” उन्होंने ग्रीनलैंड पर “कंपलीट एंड टोटल कंट्रोल” की मांग की, कहते हुए कि डेनमार्क इसे रूस या चीन से नहीं बचा सकता।
ये Trump latest news Hindi में सबसे हॉट टॉपिक बन गया है – क्या ट्रंप सच में इतने गुस्सैल हैं, या ये एक स्मार्ट पॉलिटिकल मूव? लॉजिक देखें तो ट्रंप हमेशा से नोबेल के पीछे पड़े हैं, और अब इसे ग्रीनलैंड से लिंक करके यूरोप पर दबाव बना रहे हैं।
ट्रंप ने 8 युद्ध रोके?
ट्रंप बार-बार दावा करते हैं कि उन्होंने कम से कम 8 युद्ध रोके हैं, लेकिन नोबेल कमिटी ने 2025 का प्राइज वेनेजुएला की नेता मारिया कोरिना मचाडो को दिया। मचाडो ने अपना प्राइज ट्रंप को गिफ्ट कर दिया, लेकिन कमिटी ने कहा कि प्राइज ट्रांसफर नहीं होता।
ह्यूमर की बात करें तो ट्रंप कह रहे होंगे, “नोबेल नहीं मिला तो ग्रीनलैंड ही सही!” लेकिन seriously, International politics news बताती है कि नोबेल का फैसला नॉर्वे सरकार नहीं, एक इंडिपेंडेंट कमिटी करती है। फिर भी ट्रंप ने नॉर्वे को निशाना बनाया।
ग्रीनलैंड क्यों? स्ट्रैटेजिक खेल या जिद?
ट्रंप कहते हैं कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सिक्योरिटी के लिए जरूरी है – रूस और चीन से बचाने के लिए। उन्होंने मैसेज में लिखा, “डेनमार्क के पास कोई लिखित दस्तावेज नहीं, बस सैकड़ों साल पहले एक नाव वहां पहुंची थी।” नाटो से सपोर्ट मांगा, कहते हुए कि उन्होंने नाटो के लिए सबसे ज्यादा किया है।
लॉजिक साफ है: आर्कटिक रीजन में रिसोर्सेज और मिलिट्री बेस के लिए ग्रीनलैंड महत्वपूर्ण है। लेकिन क्या ये सिर्फ जिद है? यूरोपीय लीडर्स इसे ब्लैकमेल कह रहे हैं, और ट्रंप ने टैरिफ्स की धमकी भी दी है।
नॉर्वे पीएम की प्रतिक्रिया: शांत लेकिन सख्त
जोनास गहर स्टोर ने मैसेज की पुष्टि की और कहा कि ये फिनलैंड के प्रेसिडेंट के साथ मिलकर भेजे गए एक मैसेज का जवाब था। उन्होंने क्लियर किया, “ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है, और नॉर्वे इसका पूरा सपोर्ट करता है।” मैसेज को लोकल न्यूजपेपर VG में पब्लिश किया गया।
ये सब सुनकर लगता है, ट्रंप की ये चाल कितनी दूर जाएगी? क्या नाटो में दरार पड़ेगी? Trump latest news Hindi में ये ड्रामा जारी है, और दुनिया सांस थामे देख रही है।
क्या होगा आगे? टैरिफ्स या युद्ध की धमकी?
ट्रंप ने NBC को दिए इंटरव्यू में कहा कि वो फोर्स यूज करने से इनकार नहीं करते, लेकिन आसान तरीके से करना चाहते हैं। यूरोपीय देश अब ऑप्शंस तलाश रहे हैं – क्या ट्रंप की ये मांग पूरी होगी?
ह्यूमर से कहें तो ट्रंप ग्रीनलैंड को अपना नया गोल्फ कोर्स बनाना चाहते होंगे! लेकिन फैक्ट्स पर रहें: International politics news में ये ट्रांसअटलांटिक क्राइसिस का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। निवेशक सावधान रहें, क्योंकि टैरिफ्स से मार्केट हिल सकता है।
अंत में: शांति का क्या होगा?
ट्रंप का ये Donald Trump Greenland statement हमें सोचने पर मजबूर करता है – क्या पर्सनल गुस्सा ग्लोबल पॉलिसी चला सकता है? एक्सपर्ट्स कहते हैं, ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की पॉलिसी पर चल रहे हैं, लेकिन यूरोप एकजुट हो रहा है।




