Unnao Rape Case: पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत, हाईकोर्ट के फैसले से 6 साल बाद जेल से बाहर

Unnao Rape Case: पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत, हाईकोर्ट के फैसले से 6 साल बाद जेल से बाहर

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Unnao Rape Case: चर्चित उन्नाव रेप मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने सेंगर की अपील पर सुनवाई पूरी होने तक उनकी सजा को निलंबित करते हुए उन्हें 15 लाख रुपये के निजी मुचलके और चार सख्त शर्तों पर रिहा करने का आदेश दिया है।

कोर्ट द्वारा लगाई गई प्रमुख शर्तें:

  1. पीड़ित महिला और उसके परिवार से कम से कम 5 किलोमीटर की दूरी बनाए रखना।
  2. हर सोमवार को स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करना।
  3. पासपोर्ट संबंधित अधिकारी के पास जमा कराना, ताकि वह देश छोड़कर न जा सके।
  4. इनमें से एक भी शर्त तोड़ने पर जमानत स्वतः रद्द हो जाएगी।

पूरा मामला क्या है?
यह मामला 2017 का है, जब तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उसके साथियों पर उन्नाव में एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर बलात्कार करने का आरोप लगा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले की जांच सीबीआई ने की और ट्रायल दिल्ली स्थानांतरित किया गया। 20 दिसंबर 2019 को दिल्ली की तिहाड़ अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके बाद सेंगर की विधायक सदस्यता रद्द कर दी गई थी और भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

अदालत ने सजा सुनाते समय कहा था, “सेंगर के लिए कोई सहानुभूति नहीं है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक लोक सेवक होने के नाते, सेंगर को लोगों का विश्वास प्राप्त था, जिसे उसने तोड़ा।” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद सेंगर ने अदालत में गिड़गिड़ाते हुए कहा था, “कृपया मुझे न्याय दें, मैं निर्दोष हूं।”

सेंगर का राजनीतिक सफर:
कुलदीप सिंह सेंगर को उत्तर प्रदेश के दलबदलू नेताओं में गिना जाता रहा है। वह लगातार चार बार विधायक चुने गए और कभी चुनाव नहीं हारे। उन्होंने कांग्रेस से शुरुआत की, फिर बसपा और समाजवादी पार्टी से चुनाव जीता, और अंततः 2017 में भाजपा के टिकट पर बांगरमऊ सीट से विधायक बने।

मामले की क्रमवार घटनाएं:

  • जून 2017: नाबालिग पीड़िता का अपहरण और बलात्कार। पीड़िता ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधायक सेंगर पर आरोप लगाए।
  • अप्रैल 2018: पीड़िता के पिता पर आरोपियों द्वारा जानलेवा हमला। बाद में पुलिस हिरासत में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत।
  • जुलाई 2018: मामले के एक मुख्य गवाह यूनुस की संदिग्ध मौत।
  • जुलाई 2019: पीड़िता, उसकी वकील और रिश्तेदारों की कार पर हुई संदिग्ध सड़क दुर्घटना। इस हादसे में पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • दिसंबर 2019: दिल्ली की अदालत द्वारा सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
  • दिसंबर 2025: दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सजा निलंबित करते हुए सशर्त जमानत दी गई।

निष्कर्ष:
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर को दी गई सशर्त जमानत ने इस संवेदनशील मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जहां एक तरफ अदालत ने अपील की सुनवाई तक सजा को निलंबित रखने का निर्णय लिया है, वहीं दूसरी ओर पीड़िता पक्ष को न्याय और सुरक्षा की चिंता सता रही है। पूरा देश अब हाईकोर्ट में इस अपील की सुनवाई और अंतिम न्याय के इंतजार में है। यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली और सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों की जवाबदेही के लिए एक परीक्षा की तरह बना हुआ है।