USD vs INR: नई दिल्ली। बुधवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.14 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा दिन है जब रुपये ने नया रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ है।
मुख्य कारण:
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी लगातार जारी है।
- भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
- पिछले महत्वपूर्ण स्तरों पर रुपये की कमजोरी ने तेज गिरावट को और बढ़ावा दिया।
बाजार पर प्रभाव:
रुपये में इस गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। निफ्टी 50 सूचकांक 26,000 के स्तर से नीचे आ गया, जबकि सेंसेक्स में लगभग 200 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई द्वारा रुपये को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप न करना भी एक चिंता का विषय है।
वर्ष 2025 का प्रदर्शन:
इस साल अब तक रुपया लगभग 5% गिर चुका है, जिससे यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस महीने होने वाले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद स्थिति में सुधार हो सकता है, हालांकि यह काफी हद तक समझौते की शर्तों और टैरिफ पर निर्भर करेगा।
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।)





