8th Pay Commission पर बड़ा दावा: 2026 में पेंशन स्ट्रक्चर बदलने की तैयारी? PM को भेजी गई मांग चर्चा में

8th Pay Commission

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर एक नया विकास सामने आया है। वित्त मंत्रालय द्वारा इसके लिए टर्म्स ऑफ रिफरेन्स (ToR) को मंजूरी दिए जाने के बाद अब केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई है। कर्मचारी महासंघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर कई अहम मांगें रखी हैं।

महासंघ ने जताई आपत्ति, पीएम को लिखा पत्र

केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और वर्कर्स का महासंघ, जो लगभग 130 विभागों के 8 लाख कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है, ने वित्त मंत्रालय द्वारा मंजूर किए गए ToR पर आपत्ति जताई है। महासंघ ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में ToR में बदलाव करने और अपनी मांगों को शामिल करने की अपील की है।

क्या हैं महासंघ की प्रमुख मांगें?

कर्मचारी महासंघ ने 8वें वेतन आयोग के संदर्भ में जो प्रमुख मांगें रखी हैं, वे इस प्रकार हैं:

  1. पेंशन संशोधन: विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत मिलने वाली पेंशन और पेंशनरी लाभों में संशोधन किया जाए।
  2. OPS की बहाली: पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल किया जाए और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS/UPS) की समीक्षा की जाए।
  3. लाभ का विस्तार: 8वें वेतन आयोग के लाभ स्वायत्त निकायों और ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) तक पहुंचे।
  4. अंतरिम राहत: आयोग की सिफारिशों के लागू होने तक कर्मचारियों को तुरंत 20% अंतरिम राहत दी जाए।
  5. स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: CGHS जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों तक किया जाए।

पेंशनधारकों के हितों पर चिंता

महासंघ ने ToR में मौजूदा 69 लाख पेंशनधारकों और फैमिली पेंशनर्स के लिए स्पष्ट प्रावधानों की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने ToR में इस्तेमाल हुए “अनफंडेड कॉस्ट ऑफ नॉन-कंट्रीब्यूटरी पेंशन स्कीम्स” जैसे शब्दों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह पेंशन को महज एक वित्तीय बोझ के रूप में दर्शाता है, जबकि यह एक संवैधानिक अधिकार है। महासंघ ने इस तरह के शब्दों को हटाने की मांग की है।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) पर जोर

महासंघ की एक प्रमुख मांग 1 अप्रैल 2004 के बाद भर्ती हुए लगभग 26 लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (CCS Pension Rules 1972, अब 2021) के दायरे में वापस लाने की है। उनका आग्रह है कि इस मांग को ToR में शामिल किया जाए और मौजूदा पेंशन योजनाओं की समीक्षा करके सबसे लाभकारी विकल्प की सिफारिश की जाए।

अंतरिम राहत और स्वास्थ्य सुविधाएं

आयोग के गठन और इसकी सिफारिशों के लागू होने में होने वाली देरी को देखते हुए महासंघ ने तत्काल 20% अंतरिम राहत देने की मांग की है। इससे महंगाई और देरी से होने वाले नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी और लगभग 1.2 करोड़ कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा।

साथ ही, CGHS जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाकर स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों तक पहुंचाने और जिला मुख्यालयों पर अधिक वेलनेस सेंटर खोलने का अनुरोध किया गया है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनधारकों को कैशलेस और बेहतर इलाज मिल सके।