EVM वोट काउंटिंग कैसे होती है? जानें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का पूरा प्रोसेस

EVM Vote Counting Process

EVM Vote Counting Process: मतदान खत्म होते ही सभी ईवीएम मशीनों को सील करके मजबूत कमरों में रख दिया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन मशीनों से वोटों की गिनती कैसे होती है और परिणाम का ऐलान कैसे किया जाता है? आइए समझते हैं ईवीएम से वोट गिनने की पूरी प्रक्रिया।

ईवीएम के दो हिस्से, एक काम

एक ईवीएम मशीन में मुख्य रूप से दो यूनिट होती हैं:

  • कंट्रोल यूनिट (पोलिंग अधिकारी के पास)
  • बैलेटिंग यूनिट (वोटिंग कंपार्टमेंट में)

ये दोनों यूनिट एक लंबे केबल के जरिए आपस में जुड़ी होती हैं। कंट्रोल यूनिट पर ‘बैलेट’ बटन दबाने पर ही बैलेटिंग यूनिट सक्रिय होती है और मतदाता वोट डाल पाता है।

मतदान से पहले होती है यह खास तैयारी

मतदान शुरू होने से पहले पीठासीन अधिकारी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया अपनाते हैं:

  1. सभी राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में ‘टोटल’ बटन दबाकर दिखाया जाता है कि मशीन में कोई वोट दर्ज नहीं है।
  2. इसके बाद एक ‘मॉक पोल’ कराया जाता है, जहाँ हर पार्टी का एजेंट टेस्ट के तौर पर वोट डालता है।
  3. मॉक पोल के रिजल्ट को ‘क्लियर’ बटन दबाकर हटा दिया जाता है।
  4. फिर से ‘टोटल’ बटन दबाकर जीरो रिजल्ट दिखाया जाता है।
  5. अंत में कंट्रोल यूनिट को सील कर दिया जाता है।

वोटिंग का सही तरीका

  1. पोलिंग अधिकारी कंट्रोल यूनिट पर ‘बैलेट’ बटन दबाता है।
  2. बैलेटिंग यूनिट पर उम्मीदवारों की सूची प्रदर्शित होती है।
  3. मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार के सामने बने नीले बटन को दबाकर वोट डालता है।

गिनती की प्रक्रिया में होती है कड़ी पारदर्शिता

गिनती के दिन की प्रक्रिया:

  • कंट्रोल यूनिट के ‘रिजल्ट’ बटन को दबाया जाता है।
  • यह बटन प्रत्येक उम्मीदवार को मिले वोटों की अलग-अलग संख्या दिखाता है।
  • हर बूथ की अलग-अलग ईवीएम से प्राप्त आंकड़ों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

सुरक्षा के खास इंतजाम

मतदान पूरा होने के बाद:

  • पोलिंग अधिकारी ‘क्लोज’ बटन दबाते हैं, जिसके बाद ईवीएम कोई वोट स्वीकार नहीं करती।
  • कंट्रोल यूनिट और बैलेटिंग यूनिट को अलग करके सीलबंद बक्सों में रखा जाता है।
  • सभी राजनीतिक दलों के एजेंटों को बूथ पर डाले गए कुल वोटों का ब्यौरा दिया जाता है।
  • गिनती के दिन इस ब्यौरे का मिलान किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या ईवीएम में पहले से वोट दर्ज हो सकते हैं?

नहीं, मतदान से पहले मॉक पोल और क्लियरिंग प्रक्रिया के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि मशीन पूरी तरह खाली हो।

क्या ईवीएम के रिजल्ट को बदला जा सकता है?

नहीं, मतदान के बाद मशीनों को सीलबंद कमरों में सुरक्षित रखा जाता है और गिनती के दिन ही खोला जाता है।

अगर किसी उम्मीदवार के नाम के सामने गलती से बटन दब जाए तो क्या होगा?

एक बार वोट डालने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता, इसलिए वोट डालते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन की गई है, जिससे चुनावी नतीजों पर सभी को भरोसा हो सके।