अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर तनाव में आ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामान पर 50% तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले से भारत को गहरा आर्थिक नुकसान हो सकता है। जेफरीज (Jefferies) के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटेजी और जाने-माने अर्थशास्त्री क्रिस वुड का मानना है कि इस टैरिफ से भारत की इकॉनमी पर लगभग 55-60 अरब डॉलर का झटका लगेगा।
वुड ने अपनी मशहूर साप्ताहिक रिपोर्ट “Greed & Fear” में लिखा है कि यह कदम भारत के लिए कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण साबित होगा। खासकर उन सेक्टरों में, जो बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करते हैं।
किन सेक्टरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
ट्रंप द्वारा लगाए गए इस 50% टैरिफ का सीधा असर भारतीय एक्सपोर्ट पर होगा। खासकर उन इंडस्ट्रीज़ पर जो अमेरिका में बड़े स्तर पर सामान भेजती हैं।
- टेक्सटाइल (Textile) – भारतीय कपड़ा उद्योग लंबे समय से अमेरिका को बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करता रहा है। बढ़ा हुआ टैरिफ इस सेक्टर की प्रतिस्पर्धा कम कर देगा।
- जूते और फुटवियर (Footwear) – भारत से अमेरिका को बड़ी मात्रा में जूते-चप्पल निर्यात किए जाते हैं। 50% टैरिफ इस व्यापार को महंगा बना देगा।
- गहने और जेम्स-एंड-ज्वेलरी (Gems & Jewellery) – यह सेक्टर भारत के विदेशी व्यापार का बड़ा हिस्सा है। नए टैरिफ के बाद इनकी मांग अमेरिका में घट सकती है।
वुड का कहना है कि इन सेक्टरों में करोड़ों लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में झटका सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर असर डालेगा।
रूस से तेल खरीदने पर भी जुर्माना
ट्रंप सरकार ने सिर्फ भारतीय एक्सपोर्ट पर ही नहीं, बल्कि रूस से तेल खरीदने पर भी भारत पर 25% जुर्माना लगाया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में यह अतिरिक्त जुर्माना भारत की आयात लागत को और बढ़ा देगा।
क्यों उठाया गया यह कदम?
क्रिस वुड के अनुसार, ट्रंप का यह फैसला केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। उनका कहना है कि मई में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के सैन्य संघर्ष में ट्रंप कोई अहम भूमिका नहीं निभा पाए। भारत हमेशा से तीसरे पक्ष के दखल का विरोध करता रहा है। ऐसे में ट्रंप को शांति वार्ता का श्रेय नहीं मिला और उनकी नोबेल शांति पुरस्कार पाने की उम्मीद धरी की धरी रह गई।
वुड का मानना है कि इसी नाराज़गी में ट्रंप ने भारत पर टैरिफ का यह बड़ा दांव खेला है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत और अमेरिका के बीच एक अहम व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में था।
भारतीय कृषि सेक्टर क्यों है संवेदनशील?
वुड का कहना है कि कोई भी भारतीय सरकार कभी भी कृषि को आयात के लिए पूरी तरह नहीं खोलेगी। इसकी वजह साफ है—भारत के 25 करोड़ किसान और उनसे जुड़े मजदूर अपनी रोज़ी-रोटी खेती से कमाते हैं। अगर कृषि क्षेत्र विदेशी उत्पादों के लिए खोल दिया गया, तो इसका सीधा नुकसान गरीब किसानों को होगा।
कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां की लगभग 40% आबादी कृषि पर निर्भर है। इसलिए यह सेक्टर राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है।
सर्विस सेक्टर पर ट्रंप की नज़र नहीं
भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार सर्विस सेक्टर है। आईटी सेवाओं से लेकर आउटसोर्सिंग तक, यह सेक्टर हर साल भारत को करीब 150 अरब डॉलर की कमाई कराता है।
इसके अलावा, अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों ने भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) स्थापित किए हैं, जिनसे भारत को अतिरिक्त 60 अरब डॉलर की आमदनी होती है।
वुड का कहना है कि अब तक ट्रंप का ध्यान पूरी तरह से “गुड्स बिज़नेस” यानी भौतिक वस्तुओं पर रहा है। उन्होंने सर्विस सेक्टर पर कोई सीधा कदम नहीं उठाया है।
क्या भारत चीन के करीब जाएगा?
वुड ने अपनी रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बनाता रहा, तो भारत चीन के और करीब जा सकता है।
- भारत को चीन से सस्ते सामान की जरूरत है।
- बढ़ते टैरिफ के बीच चीन भारत के लिए एक बड़ा विकल्प साबित हो सकता है।
वुड का कहना है कि अमेरिका की विदेश नीति में स्पष्टता की कमी है। इसका सबसे बड़ा नुकसान खुद अमेरिका को हो रहा है क्योंकि इससे भारत जैसे अहम सहयोगी देश चीन की ओर झुक सकते हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
यदि ट्रंप के इस फैसले को लंबे समय तक लागू रखा गया, तो भारत को कई तरह के झटके झेलने पड़ सकते हैं:
- निर्यात घटेगा – अमेरिकी बाजार भारतीय सामान के लिए महंगा हो जाएगा।
- रोजगार संकट – टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे सेक्टर में लाखों नौकरियां प्रभावित होंगी।
- आयात महंगा होगा – रूस से तेल पर 25% जुर्माना ऊर्जा लागत बढ़ा देगा।
- जीडीपी पर दबाव – 55-60 अरब डॉलर का झटका सीधे जीडीपी की ग्रोथ को धीमा करेगा।





